सैम ऑल्टमैन, जो पहले भारत के सस्ते एआई मॉडल बनाने के प्रयासों को लेकर नकारात्मक थे, अब भारत को एआई क्षेत्र में एक प्रमुख नेता के रूप में देख रहे हैं। उन्होंने माना कि भारत ने तकनीकी क्षेत्र में शानदार प्रगति की है और अब यह एआई के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उनके अनुसार भारत के युवा उद्यमियों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं की नवाचार क्षमता बहुत मजबूत है और वे लागत को कम करने में सक्षम हैं, जैसा कि भारत ने चंद्रमा पर मिशन भेजते समय दिखाया था। ऑल्टमैन ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में एआई मॉडल की लागत में 10 गुना कमी आई है। हालांकि कुछ अग्रिम शोध और मॉडल प्रशिक्षण में अब भी उच्च लागत आएगी। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि एआई के क्षेत्र में जो भी निवेश होगा, उसके परिणाम आर्थिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बेहद लाभकारी होंगे।
सैम ऑल्टमैन ने भारत को एआई में नेतृत्व देने का किया समर्थन
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