सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र से 2019 के मुस्लिम महिला (विवाह पर अधिकार की सुरक्षा) अधिनियम के तहत तीन तलाक देने वाले मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों का डेटा पेश करने को कहा। इस अधिनियम में तीन तलाक को अपराध माना गया है। मुस्लिम संगठनों ने इस कानून को संविधान के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी है। वे दावा कर रहे हैं कि जब तीन तलाक पहले ही गैरकानूनी हो चुका है, तो इसे अपराध क्यों माना जाए। केंद्र ने इस कानून की संवैधानिक वैधता का बचाव करते हुए इसे महिला अधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। कोर्ट ने इस मामले की अंतिम सुनवाई मार्च 17 से शुरू करने का निर्णय लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तीन तलाक मामलों का डेटा मांगा
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