भारतीय सेना ने 1986 में भारतीय वायु सेना (IAF) और सेना के बीच हेलीकॉप्टरों का स्वामित्व बांटा था, लेकिन अब 38 वर्षों बाद यह व्यवस्था सेना के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। वर्तमान में सेना के पास रोटरी-विंग हेलीकॉप्टर तो हैं, लेकिन मीडियम लिफ्ट और भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर IAF के नियंत्रण में हैं, जिससे युद्ध के समय सेना को बाहरी सहायता की जरूरत होती है। हमें ध्यान रखना चाहिए कि ग्लोबल सेनाओं ने अपनी हेलीकॉप्टर शक्ति को सेना के पास रखा है, जैसे अमेरिका, चीन और फ्रांस ने किया है। इसीलिए भारतीय सेना के लिए हेलीकॉप्टरों का पूर्ण स्वामित्व महत्वपूर्ण हो गया है ताकि युद्ध में तेजी से कार्रवाई की जा सके और कमांड की प्रणाली में सुधार हो सके।
भारतीय सेना को हेलीकॉप्टरों का पूर्ण स्वामित्व क्यों चाहिए?
RELATED ARTICLES